Saturday, 30 July 2016

२ पंक्ति की ज़ुबानी ।














You may or may not connect with all of it, but if you said "no dude I just loved it" after reading the first line, Like it and Share it. 

It's a Pratik Nanda creation 😇✌🏻️

Monday, 11 July 2016

उस रात..

भारी था ये मन उस कल के विचारों से,
पर इस आज को मुझे इन शब्दों में उतारना था ।

इरादों से उसके अनजान थे,
फिर भि कुछ यादों को दिल से छुड़ाना था ।

शब्दों कि कमी थी, इन आँखों में नमी थी,
पर कल फिर से ज़िंदगी से क़दम मिलाना था ।

ये वक़्त ना रुका है, ना आगे कभी रुकेगा,
बस यही अपने झहन में उतारना था ।

नींद ना जाने कहा छुपी थी, 
रात भी नज़रों में रुकी थी,
ख़याल तो बस एक हि था इस मन में,
इस रात को अपनी सुबह से मिलाना है ।