Monday, 12 December 2016

मैं था वहाँ..!!

घूम आया उन गलियों में भी,
खिलखिलाता था तू जहाँ,
ना ढूँढ सका मैं तुझको,
अब तो बता दे तु हे कहाँ,

तब बोला वो शब्द जो,
छू गये इस दिल को,
बोला दोहरा दे तू,
गुज़री हुए उस महेफिल को,
फिर समझेगा तू कि मैं हुँ कहाँ,
तू गुज़रा जिस जगह से,
दरअसल "मैं था वहाँ",

ऐनक लगाकर कल के जब,
तू क़दम रखेगा जहाँ,
मेरी पढ़ी पढ़ाई कहानीओं को,
देखेगा जब तू वहाँ,
ऐहसास होगा तुझे,
दरअसल "मैं था वहाँ",

सूमसान गलियों में जब शोर लगेगा,
हर दिशाओं में जब ग़ौर करेगा,
मुस्कुरा उठेगा तेरा दिल वहाँ,
ऐहसास होगा तुझे,
दरअसल "मैं था वहाँ",

दोहरा दी महेफिल मैंने,
धड़कने लगा दिल और,
भावनाएँ लगी इन निगाहों से बेहने,
वो फिर से बोला,
"आज से मैं हुँ यहाँ"








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