Tuesday, 24 May 2016

देखो, पढ़ो ओर महसूस करो

एक खोज पे सभी निकलते है,
कई सवाल हम सबसे करते है,
पर अनजान है उस बात से
उनके जवाब भी हम साथ लिए चलते है,

हमें ये भी चाहिये, हमें वो भी चाहिये,
आज़ादी के संग ख़ुशी भी चाहिये,
शान्ति भी चाहिये, प्यार भी चाहिये,
जीत के जश्न का मज़ा भी चाहिये,

आज़ादी तो अपनी मर्ज़ी से जिने में है,
पुछना है उन समाज के डर से जी रहे लोगों से पुछो.

ख़ुशी तो अपने देखने का नज़रिया है,
देखना है तो कभी ख़ुद को ख़ुद कि नज़र से देखो.

शांति तो इस शोर के बीच में है,
महेसुस करना है तो इन घडकनो को सुनो.

प्यार तो दुनिया के कण कण में है,
करना हि है तो पहेले ख़ुद से ईझहार करो.

असली मज़ा तो इस सफ़र में है,
समजना है तो मंज़िल कि ओर एक क़दम बढ़ा के देखो.

जीत तो लोगों के दिल जितने में है,
सिखना है तो एक अनजान शख़्स को मुस्कुरा के देखो.

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