Wednesday, 16 November 2016

ख़बर ना रही हमें!

ख़बर ना रही हमें,
कब ख़यालों से दिल लगा बैठे,
एहसास ये हमें तब हुआ,
जब दुनिया से नज़रें चुरा बैठे।

ख़बर ना रही हमें,
कब फ़ासला उस कल से बना बैठे,
एहसास ये हमें तब हुआ,
जब नज़रें उससे मिला बैठे।

ख़बर ना रही हमें,
कब सपने पलकों पे सज़ा बैठे,
एहसास ये हमें तब हुआ,
जब आँखों से मुस्कुरा बैठे।

ख़बर ना रही हमें,
कब रिश्ते कई भुला बैठे,
एहसास ये हमें तब हुआ,
जब यादों से टकरा बैठे।

ख़बर ना रही हमें,
कब जीना सबको सिखा बैठे,
एहसास ये हमें तब हुआ,
जब हमें देख के कई अपने मुस्कुरा बैठे।

No comments:

Post a Comment