एक पंछी उड़ा आसमान में,
ख़्वाहिशें लेके चाँद को पाने की,
बोल उठे वो डाल के पंछी,
ये तो ज़िद हे उसकी,
पेड़ो को छोड़ वहाँ जाने की,
उत्सुक हुआ ये मन देखने को,
कि कोशिश करेगा वो,
इन बैठे हुए पंछी को समजाने की,
पर निकला वो राही आसमानों का,
उड़ चला लेके हौसला तूफ़ानों का।
ख़्वाहिशें लेके चाँद को पाने की,
बोल उठे वो डाल के पंछी,
ये तो ज़िद हे उसकी,
पेड़ो को छोड़ वहाँ जाने की,
उत्सुक हुआ ये मन देखने को,
कि कोशिश करेगा वो,
इन बैठे हुए पंछी को समजाने की,
पर निकला वो राही आसमानों का,
उड़ चला लेके हौसला तूफ़ानों का।
Good
ReplyDelete