Wednesday, 9 November 2016

वो रोज़ की बात हो गई थी अब !

वो रोज़ की बात हो गई थी अब,
जो ज़िंदगी ऐसे अपना दिन बिताती,

कहेने को कमाने वो जाती,
कमबख़्त ख़ुद ही रोज़ ख़र्च हो जाती।

अंधेरी रात में ये सपने दिखाती,
फिर धूप निकलते ही हक़ीक़त से मिलवाती।

उलजनो के संग क़दम मिलाती,
पर रोज़ रोज़ एक नई उलजन को,
जाने अनजाने अपने गले लगाती।

हालातों  से लाचार हो जाती,
हिम्मत उस पल जुटा कर,
एक क़दम बढ़ाकर ज़रा मुस्कुराती।

वो रोज़ की बात हो गई थी अब,
जो ज़िंदगी ऐसे अपना दिन बिताती।

1 comment:

  1. 2% Population of worlds owns 98% of wealth
    While,
    98% Population owns 2% of wealth in world
    This 98% people spend their daily life same!

    ReplyDelete